उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek sukun sa dikhta hai aap ke anup mein

इक सुकूँ सा दिखता है आप के अनूप में

اک سکوں سا دکھتا ہے آپ کے انوپ میں

शायर: Zafar Awan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक सुकूँ सा दिखता है आप के अनूप में
जैसे कोई बैठा हो सर्दियों की धूप में

एक बार जो मिला वो तो हो गया तिरा
कोई जादू टोना है तेरे रंग रूप में

मेरा बस चले तो मैं चाँद तुम पे वार दूँ
तेरा हक़ ये बनता है बा-ख़ुदा सरूप में

मेरी ज़ात में तो अब ज़ात एक है बसी
जा-ब-जा मकीन है जिस्म-ओ-जाँ के लूप में

सब मकान जिस के हैं और ला-मकाँ है जो
जिस के सारे रूप हैं रहता है अरूप में

दोज़ख़ों की आग यूँ दूर हम से हो गई
बख़्श दी बहिश्त जो रब ने माँ के रूप में

ढूँडते हो तुम 'ज़फ़र' किन के राज़ को अभी
हम ने वो भी पा लिया जो छुपा निरूप में