उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat bhi musibat ho gai kya

मोहब्बत भी मुसीबत हो गई क्या

محبت بھی مصیبت ہو گئی کیا

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत भी मुसीबत हो गई क्या
वफ़ादारी ग़नीमत हो गई क्या

'अदालत फ़र्श-ए-मक़्तल धो रही है
उसूलों की शहादत हो गई क्या

तुम्हारा तज्रबा क्या है बता दो
हमें तुम से मोहब्बत हो गई क्या

किताबत रोकने का क्या सबब है
कहानी में बग़ावत हो गई क्या

मज़ार-ए-पीर से आवाज़ आई
फ़क़ीरी बादशाहत हो गई क्या

घटाएँ देखने को आ रही हैं
हमारी छत की हालत हो गई क्या

ये कैसा जश्न है उस की गली में
कोई बंदिश इजाज़त हो गई क्या

नज़र आती थी जो आँखों में तेरी
वो बेचैनी क़नाअ'त हो गई क्या