उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTne ka junun luTne ka arman nazar aaya

मिटने का जुनूँ लुटने का अरमाँ नज़र आया

مٹنے کا جنوں لٹنے کا ارماں نظر آیا

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिटने का जुनूँ लुटने का अरमाँ नज़र आया
आप आए तो कुछ जीने का सामाँ नज़र आया

सोचा था मिरे हाथ में दामन है तुम्हारा
देखा तो ख़ुद अपना ही गरेबाँ नज़र आया

देखा जो कभी ग़ौर से उस जान-ए-वफ़ा को
मासूम निगाहों में भी तूफ़ाँ नज़र आया

इस दौर में जीने का किया जब भी इरादा
उस वक़्त मुझे मरना ही आसाँ नज़र आया

इस वक़्त कि जब भूक से मरने लगी दुनिया
हिन्दू नज़र आया न मुसलमाँ नज़र आया