उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gaya wo daur to KHwabon ke silsile bhi gae

गया वो दौर तो ख़्वाबों के सिलसिले भी गए

گیا وہ دور تو خوابوں کے سلسلے بھی گئے

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गया वो दौर तो ख़्वाबों के सिलसिले भी गए
दिल-ओ-निगाह के पुर-कैफ़ हौसले भी गए

वही गए तो फिर अब शिक्वा-ओ-शिकायत क्या
शिकायतें गईं शिकवे गए गिले भी गए

बिखर के रह गई तस्वीर आरज़ूओं की
उम्मीद-ओ-आस-ओ-तमन्ना के क़ाफ़िले भी गए

यही नहीं कि बहुत सी लताफ़तें रूठीं
अदा-ओ-नाज़ के रंगीन मरहले भी गए

बुझे बुझे से हैं आशाओं के कँवल क़ादिर
ख़रोश-ए-ज़ीस्त गया दिल के वलवले भी गए