उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-kar bhi is daur mein be-kar nahin hai

बे-कार भी इस दौर में बे-कार नहीं है

بیکار بھی اس دور میں بیکار نہیں ہے

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-कार भी इस दौर में बे-कार नहीं है
दीवाना है वो कौन जो हुश्यार नहीं है

इस दौर-ए-तरक़्क़ी पे बहुत नाज़ न कीजे
इस दौर में सब कुछ है मगर प्यार नहीं है

हर चीज़ की बोहतात है इस दौर में लेकिन
वो चीज़ जिसे कहते हैं किरदार नहीं है

इस बात पे नाराज़ हैं ना-ख़ुश हैं खिंचे हैं
वो बात कि जिस बात का इज़हार नहीं है

ये बात है कुछ और कि दिल ज़ख़्मी है उस का
सूरत से तो 'क़ादिर' तिरा बीमार नहीं है