उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil muzmahil hai un ke KHayalon ke bawajud

दिल मुज़्महिल है उन के ख़यालों के बावजूद

دل مضمحل ہے ان کے خیالوں کے باوجود

शायर: Qadir Siddiqi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल मुज़्महिल है उन के ख़यालों के बावजूद
इक सैल-ए-तीरगी है उजालों के बावजूद

अल्लह री आरिफ़ाना-तजाहुल की शोख़ियाँ
समझे न मेरा हाल मिसालों के बावजूद

बदला न चश्म-ए-शौक़ का कोई भी ज़ाविया
बिगड़े हुए ज़माने की चालों के बावजूद

वारफ़्तगी-ए-शौक़ अजब ताज़ियाना थी
बढ़ना पड़ा है पाँव को छालों के बावजूद

उन की वफ़ा पे आज भी ईमान है मिरा
ऐ वहम तेरे सदहा सवालों के बावजूद

ये कौन सा मक़ाम है ऐ ज़ोम-ए-आगही
कुछ सूझता नहीं है उजालों के बावजूद

कम हो सका न मर्तबा-ए-बे-ख़ुदी-ए-शौक़
अक़्ल-ओ-ख़िरद के सदहा कमालों के बावजूद

इश्क़ इक ख़याल-ए-ख़ाम है उन के ख़याल में
'क़ादिर' के ऐसे चाहने वालों के बावजूद