उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhoDen ana ko hum to teri justuju karen

छोड़ें अना को हम तो तिरी जुस्तुजू करें

چھوڑیں انا کو ہم تو تری جستجو کریں

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छोड़ें अना को हम तो तिरी जुस्तुजू करें
पढ़नी है गर नमाज़ तो पहले वुज़ू करें

करने को दिल की बात करें सब से हम मगर
वो दिल कहाँ से लाएँ तिरे रू-ब-रू करें

मिलने का लुत्फ़ जब है कि वो हों हमीं में गुम
करने को हम तलाश उन्हें कू-ब-कू करें

क्यों उस जफ़ा-शिआ'र से छेड़ें वफ़ा की बात
क्यों ज़िक्र तिश्नगी का लब-ए-आबजू करें

ऐसों से होश्यार रहें 'क़ादिर' आप भी
जो तुम बनाएँ आप को और तुम को तू करें