उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri chiKHon se kamra bhar gaya tha

मिरी चीख़ों से कमरा भर गया था

مری چیخوں سے کمرہ بھر گیا تھا

शायर: Yasir Khan Inam7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी चीख़ों से कमरा भर गया था
कोई कल रात मुझ में मर गया था

बहुत मुश्किल है उस का लौट आना
वो पूरी बात कब सुन कर गया था

मुझे पहचानता भी है कोई अब
मैं बस ये देखने ही घर गया था

ज़माना जिस को दरिया कह रहा है
हमारी आँख से बह कर गया था

कई सदियों से सूखा पड़ रहा है
यहाँ इक शख़्स प्यासा मर गया था

हमारा बोझ था सर पर हमारे
तुम्हारे साथ तो नौकर गया था

ये मत समझा ख़ता किस से हुई थी
बता इल्ज़ाम किस के सर गया था