उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere wajud ka aaina saf usi ne kiya

मिरे वजूद का आईना साफ़ उसी ने किया

مرے وجود کا آئینہ صاف اسی نے کیا

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे वजूद का आईना साफ़ उसी ने किया
उसी को करना था आख़िर मुआ'फ़ उसी ने किया

ये मेरा गोशा-ए-दिल पाक उसी के दम से है
कि रात-दिन का यहाँ एतकाफ़ उसी ने किया

बिना बताए वो दिल में समा भी सकता है
उतर के दिल में ये सब इंकिशाफ़ उसी ने किया

मैं उस के अहद पे अब भी हूँ मुंतज़िर उस का
ख़ुद अपने अहद से भी इंहिराफ़ उसी ने किया

वरक़ वरक़ में इबारत ही पढ़ता रहता था
मैं लफ़्ज़-बीं था मुझे मूशिगाफ़ उसी ने किया