उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere KHuda mujhe itna to moatabar kar de

मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे

مرے خدا مجھے اتنا تو معتبر کر دے

शायर: Iftikhar Arif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे
मैं जिस मकान में रहता हूँ उस को घर कर दे

ये रौशनी के तआ'क़ुब में भागता हुआ दिन
जो थक गया है तो अब इस को मुख़्तसर कर दे

मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत
जो हो सके तो दुआओं को बे-असर कर दे

सितारा-ए-सहरी डूबने को आया है
ज़रा कोई मिरे सूरज को बा-ख़बर कर दे

क़बीला-वार कमानें कड़कने वाली हैं
मिरे लहू की गवाही मुझे निडर कर दे

मैं अपने ख़्वाब से कट कर जियूँ तो मेरा ख़ुदा
उजाड़ दे मिरी मिट्टी को दर-ब-दर कर दे

मिरी ज़मीन मिरा आख़िरी हवाला है
सो मैं रहूँ न रहूँ इस को बारवर कर दे