उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera wajud mere etibar jaisa hai

मिरा वजूद मिरे ए'तिबार जैसा है

مرا وجود مرے اعتبار جیسا ہے

शायर: Jagdish Prakash5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा वजूद मिरे ए'तिबार जैसा है
कभी विसाल कभी इंतिज़ार जैसा है

मुझे तो उस की मसीहाई पर था नाज़ बहुत
मगर वो ख़ुद ही बड़ा बे-क़रार जैसा है

मिरे ज़मीर पे है बोझ मेरे माज़ी का
जो मेरी ज़ात पे अब तक उधार जैसा है

अजीब एक मुअ'म्मा है इश्क़ भी 'जगदीश'
कभी ये जीत कभी सिर्फ़ हार जैसा है

यहाँ न कोई इरादा न आरज़ूएँ हैं
मिरा जुनूँ मिरे दिल के ग़ुबार जैसा है