उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera haal puchh ke ham-nashin mere soz-e-dil ko hawa na de

मिरा हाल पूछ के हम-नशीं मिरे सोज़-ए-दिल को हवा न दे

مرا حال پوچھ کے ہم نشیں مرے سوز دل کو ہوا نہ دے

शायर: Kaleem Aajiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा हाल पूछ के हम-नशीं मिरे सोज़-ए-दिल को हवा न दे
बस यही दु'आ मैं करूँ हूँ अब कि ये ग़म किसी को ख़ुदा न दे

ये जो ज़ख़्म-ए-दिल को पकाए हम लिए फिर रहे हैं छुपाए हम
कोई ना-शनास-ए-मिज़ाज-ए-ग़म कहीं हाथ उस को लगा न दे

तू जहाँ से आज है नुक्ता-चीं कभी मुद्दतों में रहा वहीं
मैं गदा-ए-राहगुज़र नहीं मुझे दूर ही से सदा न दे

तब-ओ-ताब-ए-इश्क़ का है करम कि जमी है महफ़िल-ए-चश्म-ए-नम
ज़रा देखियो ऐ हवा-ए-ग़म ये चराग़ कोई बुझा न दे

वो जो शा'इरी का सबब हुआ वो मु'आमला भी 'अजब हुआ
मैं ग़ज़ल सुनाऊँ हूँ इस लिए कि ज़माना उस को भुला न दे