उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mile na phul to kanTon se dosti kar li

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली

ملے نہ پھول تو کانٹوں سے دوستی کر لی

शायर: Kaifi Azmi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली

अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
ख़ुदा तलाश लिया और बंदगी कर ली

नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया
ज़बाँ खुली भी न थी और बात भी कर ली

वो जिन को प्यार है चाँदी से 'इश्क़ सोने से
वही कहेंगे कभी हम ने ख़ुद-कुशी कर ली