उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mila unhen bhi maza dil pe choT khane ka

मिला उन्हें भी मज़ा दिल पे चोट खाने का

ملا انہیں بھی مزہ دل پہ چوٹ کھانے کا

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिला उन्हें भी मज़ा दिल पे चोट खाने का
इरादा रखते थे जो हम को आज़माने का

वो आ गए तो दर-ओ-बाम से किरन फूटी
नसीब जाग उठा इस ग़रीब-ख़ाने का

उन्हें ख़ुदा न करे शर्मसार होना हो
हमें मलाल नहीं कुछ फ़रेब खाने का

न आह-ए-नीम-शबी कुछ न नाला-ए-सहरी
उन्हें तो उज़्र कोई चाहिए सताने का

मिटें तो कैसे मिटें हुस्न-ओ-इश्क़ के झगड़े
न वो बदलने के न दिल ही बाज़ आने का