उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri jab us se aashnai thi

मेरी जब उस से आश्नाई थी

میری جب اس سے آشنائی تھی

शायर: SabeenSaif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरी जब उस से आश्नाई थी
मेरे हमराह इक ख़ुदाई थी

गर्दिश-ए-वक़्त उस की शाहिद है
आसमाँ तक मिरी रसाई थी

याद कर मेरा साथ देने की
तू ने मेरी क़सम उठाई थी

कैसा लम्हा था जब ग़ज़ल मेरी
ज़ेर-ए-लब तू ने गुनगुनाई थी

सच तो ये है 'सबीन' घर में मिरे
आग अपनों ने ही लगाई थी