उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri aawaz ko na qaid karo

मेरी आवाज़ को न क़ैद करो

میری آواز کو نہ قید کرو

शायर: Yasmin Husaini Zaidi Nikhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरी आवाज़ को न क़ैद करो
अज़्म-ए-परवाज़ को न क़ैद करो

है रविश मेरी ज़ख़्म-ए-दिल लिखना
मेरे अंदाज़ को न क़ैद करो

किसी अंजाम-ए-बद के ख़दशे में
हुस्न-ए-आग़ाज़ को न क़ैद करो

तुम नज़र को चुरा के यूँ मुझ से
इक हसीं राज़ को न क़ैद करो

है मुक़य्यद ये ज़ात रस्मों में
दिल-ए-जाँ-बाज़ को न क़ैद करो