उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere nazariye se jo sahi hai wo baat kah dun to main ghalat hun

मेरे नज़रिये से जो सही है वो बात कह दूँ तो मैं ग़लत हूँ

میرے نظریے سے جو سہی ہے وہ بات کہہ دوں تو میں غلط ہوں

शायर: Madhavi Shankar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे नज़रिये से जो सही है वो बात कह दूँ तो मैं ग़लत हूँ
क़ुबूल कर लूँ जो जैसा कह दे जो अपनी रक्खूँ तो मैं ग़लत हूँ

कभी मोहब्बत कभी ज़रूरत के नाम कर दूँ हर एक लम्हा
किसी घड़ी जो मैं ख़ुद से बातें दो चार कर लूँ तो मैं ग़लत हूँ

है अस्ल में ये कि लड़कियों को सहीह है क्या वो पता नहीं है
हर एक लड़की ये सोचती है मैं कुछ भी चाहूँ तो मैं ग़लत हूँ

हर इक तराज़ू में तौल कर तुम मिरी मोहब्बत को रुस्वा कर दो
जो मैं भी तुम से तुम्हारे सच का सुबूत माँगूँ तो मैं ग़लत हूँ