उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere lab par hansi jo aai hai

मेरे लब पर हँसी जो आई है

میرے لب پر ہنسی جو آئی ہے

शायर: Qamar Siwani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे लब पर हँसी जो आई है
वो भी अपनी नहीं पराई है

क्या भरोसा करे वो फूलों पर
जिस ने ख़ुशबू से चोट खाई है

मान ली हार उस ने बादल से
ये तो सूरज की जग-हँसाई है

बंद हैं सारी खिड़कियाँ घर की
ऐ हवा तू किधर से आई है

बिजलियों को सज़ा न दे बादल
आग तो बर्फ़ ने लगाई है

क्या किसी को दिखाए मुँह तूफ़ाँ
मात उस ने दिए से खाई है

ऐ ज़मीं तू न कूदना इस में
चाँद सूरज की वो लड़ाई है

प्यास से बात तक न की उस ने
ये तो दरिया की कज-अदाई है

ऐ 'क़मर' मेरी एक एक ग़ज़ल
मेरे तख़्ईल की कमाई है