उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham mein Dubi subh phiki sham dekh

ग़म में डूबी सुब्ह फीकी शाम देख

غم میں ڈوبی صبح پھیکی شام دیکھ

शायर: Qamar Siwani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म में डूबी सुब्ह फीकी शाम देख
इल्तिफ़ात-ए-गर्दिश-ए-अय्याम देख

ज़र्फ़ ख़ुद्दारी शराफ़त ख़ामुशी
इन किताबों में हमारा नाम देख

मय-कदे में है फ़ज़ा-ए-अश्क-ए-ग़म
ले रहा है सिसकियाँ हर जाम देख

शहर में गरजे तो बरसे दश्त में
दौर-ए-नौ के बादलों का काम देख

हो गए वो माइल-ए-लुत्फ़-ओ-करम
सब्र के आग़ाज़ का अंजाम देख

दाने की जानिब न बढ़ मुर्ग़-ए-चमन
क़ैद का सामान ज़ेर-ए-दाम देख

राह-ए-ग़म में मिलती है कैसी ख़ुशी
साथ मेरे चल के इक दो गाम देख

लिख रहा है हर वरक़ पर तेरा नाम
ऐ 'क़मर' अपने क़लम का काम देख