उर्दू शायरी · ग़ज़ल

harf dariya hai dil samundar hai

हर्फ़ दरिया है दिल समुंदर है

حرف دریا ہے دل سمندر ہے

शायर: Qamar Siwani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर्फ़ दरिया है दिल समुंदर है
प्यास फिर भी मिरा मुक़द्दर है

तुम कहाँ तक मुझे सँभालोगे
राह में हर क़दम पे ठोकर है

मेरे आँसू का एक इक क़तरा
अपनी अपनी जगह समुंदर है

पाँव है फ़र्श-ए-ख़ाक पर मेरा
चश्म-ए-अफ़्कार आसमाँ पर है

दिल में रौशन है जो चराग़-ए-हक़
उस का क़द चाँद के बराबर है

लफ़्ज़ की सादगी है उस का लिबास
नुदरत-ए-फ़न ग़ज़ल का ज़ेवर है

सैकड़ों रिंद इस में डूब गए
कितना गहरा 'क़मर' ये साग़र है