उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaTaon se jab bhi mulaqat hogi

घटाओं से जब भी मुलाक़ात होगी

گھٹاؤں سے جب بھی ملاقات ہوگی

शायर: Qamar Siwani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घटाओं से जब भी मुलाक़ात होगी
समुंदर के दुख-दर्द की बात होगी

बता ऐ फ़लक कब सुलगती ज़मीं पर
घटाओं की चश्म-ए-इनायात होगी

सुकून-ए-जिगर तुम किसी से न माँगो
ये दौलत मिली भी तो ख़ैरात होगी

अगर ज़ख़्म-ए-दिल पर लगाओगे मरहम
न गरजेगा बादल न बरसात होगी

ख़बर क्या थी मिट जाएगी आदमिय्यत
कहीं नस्ल होगी कहीं ज़ात होगी

सितारों से ये काम मुमकिन नहीं है
चराग़ों से तूफ़ान की मात होगी

सभी बादलों के ख़ज़ाने हैं ख़ाली
'क़मर' कैसे इस साल बरसात होगी