उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maujon se Takrae hain hum tufanon se khele hain

मौजों से टकराए हैं हम तूफ़ानों से खेले हैं

موجوں سے ٹکرائے ہیں ہم طوفانوں سے کھیلے ہیں

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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मौजों से टकराए हैं हम तूफ़ानों से खेले हैं
इक जीने की ख़ातिर हम ने क्या क्या सदमे झेले हैं

क़ल्ब-ओ-नज़र के अफ़्साने ये रौनक़-ए-बज़्म-ए-ऐश-ओ-तरब
जीते जी की बातें हैं सब जीते जी के मेले हैं

उन के दम से रौनक़-ए-हस्ती उन के दम से ये दुनिया
ख़ाक-बसर हैं ज़ाहिर में जो लोग बड़े अलबेले हैं

ये अपनी हिम्मत थी हम हर मौज-ए-बला से पार हुए
खेल बहुत दिल-दोज़ थे वर्ना तक़दीर ने खेले हैं

सोचते हैं हम तिश्ना-लबों को किस ने आज नवाज़ा है
किस ने अपनी मस्त नज़र से रंगीं जाम उंडेले हैं

उन लोगों पर काश तरी कुछ चश्म-ए-'इनायत हो जाती
जिन लोगों ने तेरी ख़ातिर बरसों सदमे झेले हैं

'आसी' ज़ीस्त की राहों में मिल जाए किसी का साथ मगर
ये तक़दीर की बातें हैं सब ये तक़दीर के मेले हैं