उर्दू शायरी · ग़ज़ल

matlab ka koi sher sunaen jahan-panah

मतलब का कोई शे'र सुनाएँ जहाँ-पनाह

مطلب کا کوئی شعر سنائیں جہاں پناہ

शायर: Ehya Bhojpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मतलब का कोई शे'र सुनाएँ जहाँ-पनाह
हम सामईं पे क़हर न ढाएँ जहाँ-पनाह

बच्चों को भूके पेट सुलाने के बाद हम
कैसे ग़ज़ल के शेर सुनाएँ जहाँ-पनाह

हर सू बिखेरता हो बराबर सी रौशनी
ऐसा भी इक चराग़ जलाएँ जहाँ-पनाह

पर्दे के पीछे बैठ के खेलेंगे कब तलक
पर्दे के सामने भी तो आएँ जहाँ-पनाह

गर जान की अमाँ हो तो दरख़्वास्त है मिरी
फूलों को ख़ार से न मिलाएँ जहाँ-पनाह