उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mast nazron se allah bachae mah-jamalon se allah bachae

मस्त नज़रों से अल्लाह बचाए मह-जमालों से अल्लह बचाए

مست نظروں سے اللہ بچائے مہ جمالوں سے اللہ بچائے

शायर: श्रेय पुष्ट नहीं5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मस्त नज़रों से अल्लाह बचाए मह-जमालों से अल्लह बचाए
हर बला सर पे आ जाए मेरी हुस्न वालों से अल्लह बचाए

इन की मा'सूमियत पर न जाना इन के धोके में हरगिज़ न आना
लूट लेते हैं ये मुस्कुरा कर इन की चालों से अल्लह बचाए

भोली सूरत है बातें हैं भोली मुँह में कुछ है मगर दिल में कुछ है
लाख चेहरा सही चाँद जैसा दिल के कालों से अल्लह बचाए

दिल में है ख़्वाहिश-ए-हूर-ओ-जन्नत और ज़ाहिर में शौक़-ए-इबादत
बस हमें शैख़ जी आप जैसे अल्लाह-वालों से अल्लह बचाए

इन की फ़ितरत में है बेवफ़ाई जानती है ये सारी ख़ुदाई
अच्छे-अच्छों को देते हैं धोका भोले-भालों से अल्लह बचाए