उर्दू शायरी · ग़ज़ल

marhaba dida-e-mai-nosh mein aane wale

मर्हबा दीदा-ए-मय-नोश में आने वाले

مرحبا دیدۂ مے نوش میں آنے والے

शायर: Ehtisham Hasan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मर्हबा दीदा-ए-मय-नोश में आने वाले
अब तिरे रिंद नहीं होश में आ ने वाले

देख साक़ी रहे ख़ाली न तिरा कोई सुबू
जाम हैं दस्त-ए-बला-नोश में आने वाले

क़त्ल ऐ ज़ीस्त तिरी सेज पे धोके से हुए
मर गए सब तिरी आग़ोश में आने वाले

जा-ब-जा देख के हँसते हुए चेहरों के मज़ार
रो पड़े कूचा-ए-ख़ामोश में आने वाले

साल-हा-साल जिन्हें दश्त से मानूस किया
अब ये पाँव नहीं पा-पोश में आने वाले

इतना इदराक तो है हम को कि आसानी से
हम नहीं दस्त-ए-सितम-कोश में आने वाले

सब तरफ़-दार तिरे निकले अदाकार 'हसन'
मस्लहत-कोश थे सब जोश में आने वाले