उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baiTh kar ek Dal par filhaal

बैठ कर एक डाल पर फ़िलहाल

بیٹھ کر ایک ڈال پر فی الحال

शायर: Ehtisham Hasan9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बैठ कर एक डाल पर फ़िलहाल
ऐ परिंदे निकाल पर फ़िलहाल

बात देखें कहाँ पहुँचती है
ज़ोर है हाल-चाल पर फ़िलहाल

दुख समझना पड़ेगा बच्चे का
पहला आँसू है गाल पर फ़िलहाल

फ़िक्र-ए-नान-ए-जवीं का ग़लबा है
अपने हर इक ख़याल पर फ़िलहाल

ढल गया है उरूज का मौसम
है बुलंदी ज़वाल पर फ़िलहाल

उस की अनमोल चाहतों का उधार
है मिरे बाल बाल पर फ़िलहाल

हम तो छोड़ आए थे चमन तेरा
कौन है देख-भाल पर फ़िलहाल

इक परिंदे ने दूसरे से कहा
चल उतरते हैं जाल पर फ़िलहाल

धड़कनें मुँह को आ रही हैं 'हसन'
दिल नहीं ए'तिदाल पर फ़िलहाल