उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mar bhi jaun to kahan log bhula hi denge

मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे

مر بھی جاؤں تو کہاں لوگ بھلا ہی دیں گے

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे
लफ़्ज़ मेरे मिरे होने की गवाही देंगे

लोग थर्रा गए जिस वक़्त मुनादी आई
आज पैग़ाम नया ज़िल्ल-ए-इलाही देंगे

झोंके कुछ ऐसे थपकते हैं गुलों के रुख़्सार
जैसे इस बार तो पत-झड़ से बचा ही देंगे

हम वो शब-ज़ाद कि सूरज की 'इनायात में भी
अपने बच्चों को फ़क़त कोर-निगाही देंगे

आस्तीं साँपों की पहनेंगे गले में माला
अहल-ए-कूफ़ा को नई शहर-पनाही देंगे

शहर की चाबियाँ आ'दा के हवाले कर के
तोहफ़तन फिर उन्हें मक़्तूल सिपाही देंगे