उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mansab na kulah chahta hun

मंसब न कुलाह चाहता हूँ

منصب نہ کلاہ چاہتا ہوں

शायर: Iftikhar Arif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंसब न कुलाह चाहता हूँ
तन्हा हूँ गवाह चाहता हूँ

ऐ अजर-ए-अज़ीम देने वाले!
तौफ़ीक़-ए-गुनाह चाहता हूँ

मैं शोलगी-ए-वजूद के बीच
इक ख़त्त-ए-सियाह चाहता हूँ

डरता हूँ बहुत बुलंदियों से
पस्ती से निबाह चाहता हूँ

वो दिन कि तुझे भी भूल जाऊँ
उस दिन से पनाह चाहता हूँ