उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main TuTta rahun aisi teri raza to nahin

मैं टूटता रहूँ ऐसी तिरी रज़ा तो नहीं

میں ٹوٹتا رہوں ایسی تری رضا تو نہیں

शायर: Lutf-ur-rahman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं टूटता रहूँ ऐसी तिरी रज़ा तो नहीं
हवा-ए-तुंद में शामिल तिरी अदा तो नहीं

मैं चौंक उठा हूँ बहुत अपनी चुप के सहरा में
जो आ रही है कहीं मेरी ही सदा तो नहीं

न जाने कौन सी मंज़िल शिकस्त की आई
मिरी पुकार में पहले ये दर्द था तो नहीं

फ़ुग़ाँ पे तंग हुआ लफ़्ज़-ओ-सौत का सहरा
मिरा ख़राबा-ए-जाँ बे-कनार था तो नहीं

गुज़र सका न कोई इस दयार से अब तक
सुकूत-ए-दिल के पस-ए-पर्दा इक ख़ला तो नहीं