उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main kis se puchhta ki bhala kya kami hui

मैं किस से पूछता कि भला क्या कमी हुई

میں کس سے پوچھتا کہ بھلا کیا کمی ہوئی

शायर: Naeem Gilani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं किस से पूछता कि भला क्या कमी हुई
था शोर जिस गली में वहाँ ख़ामुशी हुई

इक मैं ही तो नहीं हूँ परेशान-ओ-पुर-मलाल
ऐ शाम तेरे साथ भी अब के बड़ी हुई

महफ़ूज़ कर न पाएँगे दीवार-ओ-बाम-ओ-दर
मेरी फ़ुग़ाँ हुई कि वो तेरी हँसी हुई

दीवार-ए-जाँ गिरा के ही निकलेगी याद-ए-यार
एक मेख़ जैसे दिल के है अंदर गढ़ी हुई

खुलती ही जा रही है गिराँबारी-ए-जुनूँ
ज़ंजीर क्या है पाँव से मेरे बंधी हुई

अब देखिए तो क्या ये वही चश्म है 'नईम'
ज़म्बील थी कि ख़्वाबों से कोई भरी हुई