उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzre waqt ki shayad tujhe KHabar kam hai

गुज़रे वक़्त की शायद तुझे ख़बर कम है

گزرے وقت کی شاید تجھے خبر کم ہے

शायर: Naeem Gilani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़रे वक़्त की शायद तुझे ख़बर कम है
मिरे सफ़र में कोई तुझ सा हम-सफ़र कम है

गिला मुआ'फ़ मगर मैं जहाँ पड़ा हुआ हूँ
मिरे चराग़ तिरी रौशनी उधर कम है

शरीक-ए-हाल हुई थी जहाँ कहीं दुनिया
फ़क़त वहीं से तिरा हिज्र-ए-मो'तबर कम है

गई रुतों में बहुत गुफ़्तुगू रही जिस से
भरे चमन में वो बस एक ही शजर कम है

तिरी नज़र में न होंगी वो मुंतज़िर शमएँ
कि दिल-गली से तो यूँ भी तिरा गुज़र कम है

बदन से आगे जो बढ़ता नहीं तबीब मिरे
सो दिल के ज़ख़्म की जानिब तिरी नज़र कम है