उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main KHwab apne sare nilam kar raha hun

मैं ख़्वाब अपने सारे नीलाम कर रहा हूँ

میں خواب اپنے سارے نیلام کر رہا ہوں

शायर: Obaid Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं ख़्वाब अपने सारे नीलाम कर रहा हूँ
और ये भी जान लो कि बे-दाम कर रहा हूँ

इस से ग़रज़ नहीं है बोली लगेगी कैसे
जो काम करना है बस वो काम कर रहा हूँ

वो सब कहानियाँ जो पूरी नहीं हुई थीं
तहरीर आज उन का अंजाम कर रहा हूँ

थक-हार सा गया था मैं राह चलते चलते
साया जो मिल गया है आराम कर रहा हूँ

सैर-ए-जहाँ की फ़ुर्सत मिलती कहाँ है मुझ को
अब क्या बताऊँ तुम को क्या काम कर रहा हूँ