उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jo duniya ki kahani mein na khoya hota

मैं जो दुनिया की कहानी में न खोया होता

میں جو دنیا کی کہانی میں نہ کھویا ہوتا

शायर: Badiuzzaman Khawar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जो दुनिया की कहानी में न खोया होता
मेरे ख़ामे ने मुसलसल मुझे लिक्खा होता

मसअला सख़्त सही और न उलझा होता
वक़्त ने भी जो मिरे ज़ह्न से सोचा होता

उस ने प्यारा सा कोई ख़त मुझे लिक्खा होता
काश कुछ दिन के लिए मुझ से वो बिछड़ा होता

नींद आँखों से न उड़ जाती तो अच्छा होता
कम से कम ख़्वाब में उस शोख़ को देखा होता

तेरी यादों ने किसी रात ये मोहलत ही न दी
कि मैं दो-चार घड़ी को भी अकेला होता

इतना नाज़ुक था कि छू लेते अगर हम उस को
वो भी शीशे की तरह फ़र्श पे बिखरा होता

काटते 'उम्र तिरे आने की उम्मीद में हम
तेरे रस्ते में अगर वक़्त भी ठहरा होता

क्या बुरा है जो गिराया है हवाओं ने उसे
ज़र्द पत्ता था किसी रोज़ तो टूटा होता

कितनी बे-सूद थी ये चुप कि मिरी बातों को
सुन भी लेता तो कोई शख़्स न समझा होता

कोई सिक्का तो नहीं थे कि न मिलते 'ख़ावर'
खो गए थे तो किसी ने हमें ढूँडा होता