उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itna nazuk tha ki chhu lete agar hum usko

इतना नाज़ुक था कि छू लेते अगर हम उस को

اتنا نازک تھا کہ چھو لیتے اگر ہم اس کو (ردیف .. ا)

शायर: Badiuzzaman Khawar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतना नाज़ुक था कि छू लेते अगर हम उस को
वो भी शीशे की तरह फ़र्श पे बिखरा होता

काटते 'उम्र तिरे आने की उम्मीद में हम
तेरे रस्ते में अगर वक़्त भी ठहरा होता

क्या बुरा है जो गिराया है हवाओं ने उसे
ज़र्द पत्ता था किसी रोज़ तो टूटा होता

कितनी बे-सूद थी ये चुप कि मिरी बातों को
सुन भी लेता तो कोई शख़्स न समझा होता

कोई सिक्का तो नहीं थे कि न मिलते 'ख़ावर'
खो गए थे तो किसी ने हमें ढूँडा होता