उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main ek ik aashna se aashna hun

मैं इक इक आश्ना से आश्ना हूँ

میں اک اک آشنا سے آشنا ہوں

शायर: Charkh Chinioti9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं इक इक आश्ना से आश्ना हूँ
ख़ुलूस उन में है कितना जानता हूँ

तिरी बात आई थी लब पर ज़रा सी
ज़माने भर की बातें सुन रहा हूँ

ये कोई जानी-पहचानी जगह है
अचानक चलते चलते रुक गया हूँ

तमाशा है ये मेरी बे-ख़ुदी का
मैं अपने आप में गुम हो गया हूँ

मिरी आँखें हैं गोया उन की आँखें
जिधर वो देखते हों देखता हूँ

तिरे ख़्वाबों की दुनिया सामने है
मैं झूटी नींद शायद सो रहा हूँ

तिरे कूचे में मेला लग रहा है
मैं इक वीरान रस्ते पर खड़ा हूँ

ये मिल कर फिर कभी मिलती नहीं हैं
तिरी नज़रों को मैं पहचानता हूँ

सितम हो या करम ऐ 'चर्ख़' कुछ हो
मोहब्बत का मैं सदक़ा बन गया हूँ