उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gungunati hui aawaz kahan se laun

गुनगुनाती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ

گنگناتی ہوئی آواز کہاں سے لاؤں

शायर: Charkh Chinioti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुनगुनाती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ
तेरी आवाज़ का अंदाज़ कहाँ से लाऊँ

तेरे अल्ताफ़ से रक़्साँ हैं लबों पर ख़ुशियाँ
ग़म में डूबी हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ

हाल-ए-दिल फूल से चेहरों को सुनाने के लिए
मैं लब-ए-ज़मज़मा-पर्वाज़ कहाँ से लाऊँ

मुझ से हंस हंस के तिरी मश्क़-ए-सितम होती है
तुझ सा मोनिस बुत-ए-तन्नाज़ कहाँ से लाऊँ

शोमी-ए-बख़्त है ये 'चर्ख़' कि वो कहते हैं
मैं मसीहाई का अंदाज़ कहाँ से लाऊँ