उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main ek bahta dariya hun

मैं इक बहता दरिया हूँ

میں اک بہتا دریا ہوں

शायर: Tahir Tilhari12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं इक बहता दरिया हूँ
लेकिन कितना प्यासा हूँ

राह में गुम-सुम बैठा हूँ
इक इक का मुँह तकता हूँ

तुझ को अपना कहता हूँ
कितना भोला-भाला हूँ

धूप में तपता सहरा हूँ
जनम जनम का प्यासा हूँ

फिर तुझ तक लौट आया हूँ
शायद खोटा सिक्का हूँ

अक्सर तेरे बारे में
सपने देखा करता हूँ

तू भी एक खिलौना है
मैं भी एक खिलौना हूँ

मेरी फ़ितरत चाँद सी है
घटता बढ़ता रहता हूँ

बच्चों की फ़रमाइश पर
झूटे वा'दे करता हूँ

यारो कुछ दम लेने दो
दूर से चल कर आता हूँ

मुस्तक़बिल के बारे में
क्या क्या सोचा करता हूँ

'ताहिर' घर की चौखट पर
जाने क्यों चुप बैठा हूँ