उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main hawa ko munjamid kar dun to kaise sans lun

मैं हवा को मुंजमिद कर दूँ तो कैसे साँस लूँ

میں ہوا کو منجمد کر دوں تو کیسے سانس لوں

शायर: Rafiq Sandelvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं हवा को मुंजमिद कर दूँ तो कैसे साँस लूँ
रेत पर गिर जाऊँ और फिर उखड़े उखड़े साँस लूँ

कब तलक रोके रखूँ मैं पानियों की तह में साँस
क्यूँ न इक दिन सत्ह-ए-दरिया से निकल के साँस लूँ

क़िला-ए-कोह-सार पर मैं रख तो दूँ ज़र्रीं चराग़
लेकिन इतनी शर्त है कि उस के बदले साँस लूँ

ख़्वाब के मतरूक गुम्बद से निकल कर एक दिन
अपनी आँखें खोल दूँ और लम्बे लम्बे साँस लूँ