उर्दू शायरी · ग़ज़ल

andhere ke taaqub mein kai kirnen laga dega

अँधेरे के तआक़ुब में कई किरनें लगा देगा

اندھیرے کے تعاقب میں کئی کرنیں لگا دے گا

शायर: Rafiq Sandelvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अँधेरे के तआक़ुब में कई किरनें लगा देगा
वो अंधा दाव पर अब के मिरी आँखें लगा देगा

मुसलसल अजनबी चापें अगर गलियों में उतरेंगी
वो घर की खिड़कियों पर और भी मेख़ें लगा देगा

फ़सील-ए-संग की तामीर पर जितना भी पहरा हो
किसी कोने में कोई काँच की ईंटें लगा देगा

मैं इस ज़रख़ेज़ मौसम में भी ख़ाली हाथ लौटा तो
वो खेतों में क़लम कर के मिरी बाहें लगा देगा

वो फिर कह देगा सूरज से सवा नेज़े पे आने को
कटे पेड़ों पे पहले मोम की बेलें लगा देगा