उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ana ko KHud par sawar maine nahin kya tha

अना को ख़ुद पर सवार मैं ने नहीं क्या था

انا کو خود پر سوار میں نے نہیں کیا تھا

शायर: Rafiq Sandelvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अना को ख़ुद पर सवार मैं ने नहीं किया था
तुम्हारे पीछे से वार मैं ने नहीं किया था

वो ख़ुद गिरा था लहू-फ़रोशी की पस्तियों में
उसे नहीफ़ ओ नज़ार मैं ने नहीं किया था

पके हुए फल ही तोड़े थे मैं ने टहनियों से
शजर को बे-बर्ग-ओ-बार मैं ने नहीं किया था

निशाना बाँधा था आशियानों की सम्त लेकिन
कोई परिंदा शिकार मैं ने नहीं किया था

कुछ इस क़दर थे हवास गुम-सुम कि वक़्त-ए-हिजरत
बिलकते बच्चों को प्यार मैं ने नहीं किया था

मिरे मसाइल तो ख़ुद-ब-ख़ुद ही सुलझ गए थे
कहीं भी सोच-ओ-बिचार मैं ने नहीं किया था