उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jhuka hua hai jo mujh par wujud mera hai

झुका हुआ है जो मुझ पर वुजूद मेरा है

جھکا ہوا ہے جو مجھ پر وجود میرا ہے

शायर: Rafiq Sandelvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

झुका हुआ है जो मुझ पर वुजूद मेरा है
ख़ुद अपने ग़ार का पत्थर वुजूद मेरा है

ये चाप तीरगी नीचे को जा रहा ज़ीना
इसी सुरंग के अंदर वुजूद मेरा है

नहीं है इस में किसी की शराकत-ए-नफ़्सी
ये बात तय है सरासर वुजूद मेरा है

मुशाबह दोनों हैं फिर भी रुख़-ए-तमन्ना से
तिरे वुजूद से बढ़ कर वुजूद मेरा है

ये हद्द-ए-ख़ीरगी जिस पर है जल्वा-आरा तू
बस इस से अगले क़दम पर वुजूद मेरा है