उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main duaen de raha hun aaj us ustad ko

मैं दु'आएँ दे रहा हूँ आज उस उस्ताद को

میں دعائیں دے رہا ہوں آج اس استاد کو

शायर: Tahseen Moradabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं दु'आएँ दे रहा हूँ आज उस उस्ताद को
जिस ने मुस्तहकम किया है 'इल्म की बुनियाद को

मिट नहीं सकती है ये उर्दू ज़बाँ की शा'इरी
हम अगर उर्दू पढ़ाएँ दोस्तो औलाद को

ग़ैर का शिकवा ही क्या है ग़ैर की चर्चा ही क्या
भूल सकता ही नहीं मैं अपनों की बेदाद को

एक यही दिल में तमन्ना 'उम्र भर पलती रही
अपना कह कर तुम सदा देते तो मुझ बर्बाद को

है यक़ीं 'तहसीन' का तो शे'र मा'नी-ख़ेज़ हों
लोग कहते हैं ग़ज़ल में कामयाबी दाद को