उर्दू शायरी · ग़ज़ल

laga ranjha ne jaise hir dekhi

लगा राँझा ने जैसे हीर देखी

لگا رانجھا نے جیسے ہیر دیکھی

शायर: Tahseen Moradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगा राँझा ने जैसे हीर देखी
यकायक जो तिरी तस्वीर देखी

दिया है साथ लफ़्ज़ों ने हमेशा
फ़साने की हसीं तफ़्सीर देखी

बुराई के मिरे पहलू निकाले
'अदू ने कब कोई तख़्सीर देखी

बढ़े हद से जो जज़्बात-ए-मोहब्बत
शिकस्ता ज़ब्त की ज़ंजीर देखी

क़दम-बोसी को ख़िल्क़त आ रही है
मदीने की हसीं तौक़ीर देखी

उठाया जब कभी 'तहसीन' पत्थर
ख़ुद अपने सर पे भी शमशीर देखी