उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon KHauf-e-imtihan se munh us ka faq na ho

क्यों ख़ौफ़-ए-इम्तिहान से मुँह उस का फ़क़ न हो

کیوں خوف امتحان سے منہ اس کا فق نہ ہو

शायर: Tahseen Moradabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों ख़ौफ़-ए-इम्तिहान से मुँह उस का फ़क़ न हो
अज़बर हयात-ओ-मौत का जिस को सबक़ न हो

अंदाज़ ऐसा लाइए अपने बयान में
सुन कर 'अदू के दिल पे भी जिस का क़लक़ न हो

इक राब्ता है डूबते सूरज से चाँद का
मुमकिन नहीं के शाम हो रंग-ए-शफ़क़ न हो

शादाब जिस ने ख़ून से अपने किया चमन
ये क्या कि एक फूल का वो मुस्तहक़ न हो