उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main andhera ek shab ka tera sham sa zamana

मैं अंधेरा एक शब का तिरा शम' सा ज़माना

میں اندھیرا ایک شب کا ترا شمع سا زمانہ (ردیف .. ا)

शायर: Charan Singh Bashar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं अंधेरा एक शब का तिरा शम' सा ज़माना
भला कैसे होगा मुमकिन कोई मिल के घर बसाना

अभी आग से लिपटने का हुनर है मुझ में ज़िंदा
अभी गर्दिश-ए-ज़माना मिरे सामने न आना

जहाँ बे-ज़मीर अँधेरों ने किया है ख़ैर-मक़्दम
उसी राह पर चराग़ों को जला के छोड़ जाना

मिरा दिल है मुज़्तरिब सा तिरा दिल है मुतमइन सा
न तिरा यहाँ ठिकाना न मिरा यहाँ ठिकाना

मैं सफ़र पे लौट जाने का इरादा जब करूँ हूँ
कोई ऐ 'बशर' कहे है मिरे शहर से न जाना