उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahw kar Dali kisi ne dil se meri yaad tak

महव कर डाली किसी ने दिल से मेरी याद तक

محو کر ڈالی کسی نے دل سے میری یاد تک

शायर: Badr Muneer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महव कर डाली किसी ने दिल से मेरी याद तक
हो नहीं सकती मगर इस ज़ुल्म पर फ़रियाद तक

वहशतें इतनी बढ़ी हैं कारोबार-ए-शौक़ में
दूर मुझ से भागता है अब मिरा हम-ज़ाद तक

तेरी मेरी लग़्ज़िशों पर ही कहाँ मौक़ूफ़ है
बात चल निकली तो फिर जाएगी ये अज्दाद तक

सोचता हूँ क्या करेंगे इंदिमाल-ए-दर्द-ए-दिल
ग़ौर से सुनते नहीं हैं जो मिरी रूदाद तक

बन गए इंसान अपनी ज़ात में जंगल 'मुनीर'
उड़ गई है बस्तियों से बू-ए-आदम-ज़ाद तक