उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahsus ho raha hai jo gham meri zat ka

महसूस हो रहा है जो ग़म मेरी ज़ात का

محسوس ہو رہا ہے جو غم میری ذات کا

शायर: Badiuzzaman Khawar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महसूस हो रहा है जो ग़म मेरी ज़ात का
सच पूछिए तो दर्द है वो काएनात का

घर की घुटन से दूर निकल जाए आदमी
सड़कों पे ख़ौफ़ हो न अगर हादसात का

अपने बदन को और थकाओ न दोस्तो
ढल जाए दिन तो बोझ उठाना है रात का

इक दूसरे को ज़हर पिलाते हैं लोग अब
बातों में शहद घोल के क़ंद-ओ-नबात का

हर शख़्स तेरे शहर में मुजरिम बना हुआ
फिरता है ढूँढता हुआ रिश्ता नजात का

इस में किसी का अक्स न चेहरा दिखाई दे
धुँदला गया है आइना 'ख़ावर' हयात का