उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahfil mein sab ko apna parastar kar diya

महफ़िल में सब को अपना परस्तार कर दिया

محفل میں سب کو اپنا پرستار کر دیا

शायर: Onkar Singh Vivek6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महफ़िल में सब को अपना परस्तार कर दिया
शीरीं-ज़बाँ से उस ने चमत्कार कर दिया

हम जैसों में कहाँ थी भला ये सलाहियत
सोहबत ने शा'इरों की सुख़न-कार कर दिया

ख़बरों में सच की पहले सी ख़ुशबू नहीं रही
सो बंद हम ने आज से अख़बार कर दिया

रखते हैं अब हर एक क़दम देख-भाल कर
इतना तो ठोकरों ने समझदार कर दिया

क़ाएम रहे हमारी किताबों से दोस्ती
इस ने ग़रीब-ए-फ़िक्र को ज़रदार कर दिया

आती है शर्म आज बताते हुए 'विवेक'
लोगों ने राजनीति को ब्योपार कर दिया