उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahakne ka qarina aa gaya hai

महकने का क़रीना आ गया है

مہکنے کا قرینہ آ گیا ہے

शायर: Kaleem Noori Firozabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महकने का क़रीना आ गया है
ग़ज़ल को ज़ख़्म सीना आ गया है

चराग़ों की लवें अब सुस्त कर दो
सितारों को पसीना आ गया है

ऐ मेरी ज़िंदगी तुझ से बिछड़ कर
मुझे क़िस्तों में जीना आ गया है

चलो तूफ़ाँ से भी अब बात कर लें
किनारे पर सफ़ीना आ गया है

उतर जाएगा सूरज तेरा नश्शा
दिसम्बर का महीना आ गया है