उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahak labon ki main sanson mein chhoD aaya hun

महक लबों की मैं साँसों में छोड़ आया हूँ

مہک لبوں کی میں سانسوں میں چھوڑ آیا ہوں

शायर: Naeem Najmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महक लबों की मैं साँसों में छोड़ आया हूँ
मैं उस को नींदों में ख़्वाबों में छोड़ आया हूँ

मैं अपने घर में तर-ओ-ताज़ा आया हूँ हो कर
थकान जिस्म की रस्तों में छोड़ आया हूँ

बुज़ुर्गी आई है जिस दिन से मेरे लहजे में
शरारतें सभी बच्चों में छोड़ आया हूँ

वगर्ना आज भी घर से निकलना मुश्किल था
उसे लगा के मैं बातों में छोड़ आया हूँ

दिये थे उस ने मोहब्बत की जो निशानी में
वो फूल रख के किताबों में छोड़ आया हूँ